नई दिल्ली: गांधी परिवार पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का ताजा हमला, राजीव गांधी के पत्र पर उठाए सवाल

New Delhi: BJP MP Nishikant Dubey's latest attack on Gandhi family, raises questions on Rajiv Gandhi's letter

नई दिल्ली: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर गांधी परिवार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच हुए पत्राचार का हवाला देते हुए कांग्रेस से तीखे सवाल पूछे हैं। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर रीगन के पत्र को साझा करते हुए कटाक्ष किया, “गांधी होना आसान नहीं।”

दुबे ने कहा कि 1972 के शिमला समझौते के तहत यह तय हो गया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच कोई भी विवाद केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाएगा, किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होगी। फिर भी राजीव गांधी ने अमेरिका से पाकिस्तान से बातचीत में मदद क्यों मांगी?

इंदिरा गांधी पर भी उठाए सवाल
इससे पहले 27 मई को दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए लिखा था कि ‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव में 1971 का युद्ध रोक दिया, जबकि तत्कालीन रक्षा मंत्री जगजीवन राम और सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ इसके विरोध में थे। दुबे ने पूछा कि क्या यह निर्णय कश्मीर के कब्जे वाले हिस्से को छोड़कर बांग्लादेश बनाने तक ही सीमित था? उन्होंने इंदिरा गांधी की राजनीतिक सोच पर भी सवाल खड़े किए।

कांग्रेस पर “सरेंडर” करने का आरोप
भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर कांग्रेस की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि वास्तविक “सरेंडर” तो कांग्रेस ने 1991 में किया था। उन्होंने मांग की कि उस समझौते की जांच होनी चाहिए, जिसके तहत 1994 में यह लागू किया गया जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे।

दुबे के अनुसार, उस समझौते में भारत ने बताया था कि सेना, नौसेना और वायुसेना किस तरह तैनात होंगी और ये सारी जानकारी 15 दिन पहले साझा करनी होगी। उन्होंने इसे देश के हितों के खिलाफ बताया और सवाल उठाया, “क्या यह देशद्रोह नहीं है?”

आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई का दावा
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को तबाह किया है, जिसकी पुष्टि अंतरराष्ट्रीय मीडिया कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि वह अब भी सरकार की कार्रवाई पर संदेह क्यों कर रही है?

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